वोडाफोन ने 20 हजार करोड़ रुपए का टैक्स विवाद का मामला जीता, भारत सरकार के खिलाफ सिंगापुर कोर्ट में था मामला

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टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन ने 20 हजार करोड़ रुपए के टैक्स विवाद के मामले में भारत सरकार को हराकर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का केस जीत लिया है। कंपनी ने शुक्रवार को बताया कि उसे सिंगापुर के एक इंटरनेशनल कोर्ट में 12 हजार करोड़ रुपए के बकाए और 7,900 करोड़ रुपए के जुर्माने वाले मामले में भारत सरकार के खिलाफ जीत मिली है।

वोडाफोन के लिए यह बहुत ही राहत की बात है क्योंकि कंपनी को भारत में 53 हजार करोड़ रुपए एजीआर के रूप में अगले दस साल तक चुकाने हैं।

कंपनी का शेयर 13.60 प्रतिशत बढ़ा

इस फैसले के बाद बीएसई में कंपनी का शेयर 13.60 प्रतिशत बढ़कर 10.36 रुपए पर बंद हुआ। वोडाफोन ने 2016 में भारत सरकार के खिलाफ सिंगापुर के इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर यानी अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र के पास याचिका दाखिल की थी। यह विवाद लाइसेंस फीस और एयरवेव्स के इस्तेमाल पर रेट्रोएक्टिव टैक्स क्लेम को लेकर शुरू हुआ था।

संधियों के विपरीत है भारत सरकार की मांग

इंटरनेशनल कोर्ट ने कहा कि भारत के टैक्स विभाग द्वारा जो भी देनदारी, ब्याज और पेनाल्टी लगाई गई है वह भारत और नीदरलैंड के बीच हुए द्वीपक्षीय निवेश की संधियों (बिलैटरल इन्वेस्टमेंट ट्रीटी) के नियमों फेयर गारंटी और बराबर के ट्रीटमेंट के खिलाफ है। वोडाफोन इंटरनेशनल होल्डिंग की ओर से वकील अनुराधा दत्त ने पैरवी की।

सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी तरह का फैसला दिया था

उन्होंने कहा कि वोडाफोन की यह दूसरी जीत है। क्योंकि इससे पहले साल 2012 में इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी तरह का फैसला दिया था। इस फैसले के बाद वोडाफोन ने कहा कि अंत में हम न्याय पाने में सफल रहे हैं। टेलीकॉम कंपनी ने 20 हजार करोड़ रुपए में कैपिटल गेन, टैक्स, पेनाल्टी और ब्याज को लेकर यह मामला दायर किया था।

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कंपनी ने शुक्रवार को बताया कि उसे सिंगापुर के एक इंटरनेशनल कोर्ट में 12 हजार करोड़ रुपए के बकाए और 7,900 करोड़ रुपए के जुर्माने वाले मामले में भारत सरकार के खिलाफ जीत मिली है